महिलाओं की स्थिति किसी भी समाज के विकास के लिए प्रगति का महत्वपूर्ण मानदंड होती है इसका कारण यह है की माँ बेटी बहन और बहु के रूप में महिलाएं परिवार की महत्वपूर्ण कड़ी होती है । भविष्य की पीडी जब कच्ची उम्र में होती है तो महिलाएं ही उनकी महत्वपूर्ण नींव का निर्माण करती है। इसलिए कहा जाता है कि अगर आप किसी पुरूष को पदाते है तो आप केवल एक व्यक्ति को पदाते है। लेकिन अगर आप एक महिला को शिक्षित बनाते है तो आप पूरे परिवार को शिक्षित बना रहे होते है। भारत में सदियों से महिलाओं की भूमिका में ब्यापक बदलाव आया है।
हमारे समाज में आज दहेज़ , ह्त्या , महिलाओं की छेड़छाड़ की आये दिन होने वाली घटनाएं एक ऐसी बिमारी के लक्षण है जो समाज में महिलाओं को उनका सही दर्जा नही मिलने के कारण उत्पन्न हुयी है।
सामाजिक परिवेश के तमाम पहलुओं के बारे में लोगो की धारणाओं को बदलने में मीडिया की भूमिका काफी महत्वपूर्ण सिद्ध हुई है। अनेक समाज सुधारको ने महिलाओं की स्थिति को सुधारने हेतु अपने विचारो को जन सामान्य वर्ग तक पहुंचाने हेतु मीडिया का ही सहारा लिया जिसके परिणामस्वरूप महिलाओं की स्थिति वर्तमान समय में काफी सुदृढ़ हो गई है।
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aap ka kahna achchha hai . aap mahila hai isliye to mahilaon ki baat karti hai.
ReplyDeletemahilaon ne ghar ki dahleej ko langha hai aur pursho se kandh se kandh milaya hai. lekin abhi bahut kuchh baki hai. achchha likhi hai aap.
ReplyDeletemahilayen kaha piche hai aur mahilawon ki tang bhi to mahila hi khichti hai ham to nahi
ReplyDeleteबहुत सही और सारगर्भित बात कही आपने -
ReplyDelete"अगर आप एक महिला को शिक्षित बनाते है तो आप
पूरे परिवार को शिक्षित बना रहे होते है।"
देखा जाए तो लोगों की सोच में अब काफी बदलाव
आने लगा है ! लड़कियां अब हर क्षेत्र में पुरुष के
साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही हैं !
अगर आप आज से २० वर्ष पहले का सोचिये और
फिर उससे भी २० वर्ष पहले का सोचिये तो सुकून
महसूस करेंगी ! परिवर्तन यूँ भी रातों रात नहीं होता !
लिखते रहिये
मेरी शुभकामनाएं !
आज की आवाज
धीरे धीरे मिल रहा महिला को सम्मान।
ReplyDeleteमहिला को भी चाहिए रखें पुरुष का मान।।
सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com
आप से एक अनुरोध:
ReplyDeleteनारी हैं इसलिए 'नारी विमर्श ' पर ही लिखना है, ऐसी कोई बात नहीं है.
विविध प्रसंगों से इस विधा और हिन्दी को समृद्ध करें.
ढेर सारी शुभकामनाएँ.
word verification हटा दें तो टिप्प्णकारों को सुविधा होगी.
ReplyDeleteधन्यवाद्
dhnya ho
ReplyDeletejai ho
bahut achhi post
badhai
अच्छी बात। महिलायें समाज में सदैव उत्पादकता से जुड़ी रही हैं लेकिन उनके श्रम का पर्याप्त मूल्यांकन नहीं हुआ है। पुरुष घर से बाहर जितना कमाता है स्त्री घर के कार्यों को करके उससे कम मूल्य पैदा नहीं करती परंतु इस तरफ से समाज और मीडिया दोनो मौन हैं।
ReplyDeleteशुभकामनायें
बहुत सुंदर…..आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्लाग जगत में स्वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।
ReplyDeletesahi bat hai. narayan narayan
ReplyDeleteThis comment has been removed by the author.
ReplyDeleteसही कहा आपने.....आभार
ReplyDeleteआप की रचना प्रशंसा के योग्य है . लिखते रहिये
ReplyDeleteचिटठा जगत मैं आप का स्वागत है
गार्गी
चिटठा जगत मैं आप का स्वागत है अच्छे विचार हैं आपके। लिखते रहीये हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।
ReplyDeleteमहिलाओं की स्थिति में आज निश्चित रूप से बदलाव आया है।आज नारि अबला नहीं है। वह पुरुष मे साथ कन्धे से कन्धा मिलाकर आगे बढ रही है। नारि को अबला क आभास केवल राजनीति की रोटियां सेकने वाले लोग ही करते हैंऔर हम उनकी बातों में आकर अपने आपको असहाय और पिछडा हुआ सोचने लगते हैं ।यदि आगे बढना है तो ्स्वय्म के बल पर ही हिम्मत करनी होगी।
ReplyDeleteअमित जी की टिप्पणी में समय को भी जोड लें...
ReplyDeleteसुस्वागतम्...
apka blog padkar mujhe achchhaa laga. bahut bahut dhanyavaad.
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