महिलाओं की स्थिति किसी भी समाज के विकास के लिए प्रगति का महत्वपूर्ण मानदंड होती है इसका कारण यह है की माँ बेटी बहन और बहु के रूप में महिलाएं परिवार की महत्वपूर्ण कड़ी होती है । भविष्य की पीडी जब कच्ची उम्र में होती है तो महिलाएं ही उनकी महत्वपूर्ण नींव का निर्माण करती है। इसलिए कहा जाता है कि अगर आप किसी पुरूष को पदाते है तो आप केवल एक व्यक्ति को पदाते है। लेकिन अगर आप एक महिला को शिक्षित बनाते है तो आप पूरे परिवार को शिक्षित बना रहे होते है। भारत में सदियों से महिलाओं की भूमिका में ब्यापक बदलाव आया है।
हमारे समाज में आज दहेज़ , ह्त्या , महिलाओं की छेड़छाड़ की आये दिन होने वाली घटनाएं एक ऐसी बिमारी के लक्षण है जो समाज में महिलाओं को उनका सही दर्जा नही मिलने के कारण उत्पन्न हुयी है।
सामाजिक परिवेश के तमाम पहलुओं के बारे में लोगो की धारणाओं को बदलने में मीडिया की भूमिका काफी महत्वपूर्ण सिद्ध हुई है। अनेक समाज सुधारको ने महिलाओं की स्थिति को सुधारने हेतु अपने विचारो को जन सामान्य वर्ग तक पहुंचाने हेतु मीडिया का ही सहारा लिया जिसके परिणामस्वरूप महिलाओं की स्थिति वर्तमान समय में काफी सुदृढ़ हो गई है।
Sunday, May 24, 2009
वक़्त
वक़्त तो वक़्त है
इस वक़्त को समझो न बेवक्त।
हर पल हंसाता है वक़्त
तो रुलाता भी वक़्त ।
अच्छा बनाता है वक़्त तो
बुरा भी बनाता है वक़्त ।
नीचे गिराता है वक़्त तो
उपर उठाता है वक़्त ।
वक़्त अगर कुछ देता है तो
उसे छीनता भी वक़्त ही है।
वक़्त अगर देता है चोट तो
मरहम भी बनता है वक़्त।
जिसने समझा वक़्त को वक़्त
वो कभी न हुआ बेवक्त।
जिसने न समझा वक़्त को वक़्त
वो हर पल हुआ बेवक्त।
वक़्त तो वक़्त है
इस वक़्त को समझो न बेवक्त ।
इस वक़्त को समझो न बेवक्त।
हर पल हंसाता है वक़्त
तो रुलाता भी वक़्त ।
अच्छा बनाता है वक़्त तो
बुरा भी बनाता है वक़्त ।
नीचे गिराता है वक़्त तो
उपर उठाता है वक़्त ।
वक़्त अगर कुछ देता है तो
उसे छीनता भी वक़्त ही है।
वक़्त अगर देता है चोट तो
मरहम भी बनता है वक़्त।
जिसने समझा वक़्त को वक़्त
वो कभी न हुआ बेवक्त।
जिसने न समझा वक़्त को वक़्त
वो हर पल हुआ बेवक्त।
वक़्त तो वक़्त है
इस वक़्त को समझो न बेवक्त ।
Saturday, May 23, 2009
शिक्षा और समाज
शिक्षा और समाज का आपस में गहरा सम्बन्ध है । किसी भी देश का विकास हों सकता है जब प्रत्येक व्यक्ति शिक्षित हों । एक शिक्षित .व्यक्ति समाज के विकास में सहायक होता है बिना शिक्षा के न तो किसी के सुनहरे भविष्य की कल्पना की जा है और न ही किसी समाज की प्रगति का । शिक्षा के आभाव के कारण ही आज ग्रामीर क्षेत्र का विकास शहरों की अपेक्षा अधिक नहीं
ho पाया है । संसार की प्रत्येक वस्तु को सोचने समझने के लिए शिक्षा की आवश्यकता होती है अतः
शिक्षा प्रत्येक व्यक्ति के लिए बहुत आवश्यक है ।
ho पाया है । संसार की प्रत्येक वस्तु को सोचने समझने के लिए शिक्षा की आवश्यकता होती है अतः
शिक्षा प्रत्येक व्यक्ति के लिए बहुत आवश्यक है ।
Friday, May 22, 2009
तुम.....
हर चेहरे में तुमको ढूंढा
स्नेह त्याग,प्यार में तुमको पाया
अपनों के दर्द मे पिघली तुम
उनके हर राह की हमसफ़र तुम
जीवन के पतझर में बहार- सी तुम
बदलती दुनिया में विशवास - सी तुम
रुत आए रुत जाए पर
हर दौर में एक - सी तुम
ख्यालों के पन्नों पर तुमसे जुडे
न जाने कितने एहसास डूबते - उतरते
पर शब्दों में क्यों नहीं बंधती तुम
न कभी देखा , न कभी जाना तुमसा
मेरी नज़र से देखो तो जानोगी
ईश्वर का रूप हो तुम ...
स्नेह त्याग,प्यार में तुमको पाया
अपनों के दर्द मे पिघली तुम
उनके हर राह की हमसफ़र तुम
जीवन के पतझर में बहार- सी तुम
बदलती दुनिया में विशवास - सी तुम
रुत आए रुत जाए पर
हर दौर में एक - सी तुम
ख्यालों के पन्नों पर तुमसे जुडे
न जाने कितने एहसास डूबते - उतरते
पर शब्दों में क्यों नहीं बंधती तुम
न कभी देखा , न कभी जाना तुमसा
मेरी नज़र से देखो तो जानोगी
ईश्वर का रूप हो तुम ...
Wednesday, May 13, 2009
my aim blog
आज मेरा ब्लॉग का पहला दिन है । आज मुझे ऐसा लग रहा है जैसे की मै कोई पेपर का संपादक हू। जिस प्रकार एक संपादक अपने विचारो को बिना रोक टोक लिख सकता है। उसी प्रकार मै भी बिना रोक टोक के अपने विचारो को लिख सकती हूँ । इस ब्लॉग के माध्यम से मै अपने विचारो को लिख रही हूँ। क्योकी मुझे ऐसा लग रहा है की मै भी कुछ कर सकती हूँ। लोगो के सामने अपने विचारो को प्रस्तुत कर सकती हूँ। आज मै इतनी खुश हूँ की अब मेरी खुशी का ठिकाना नही है। आज के लिए बस इतना ही । मै अगले दिन अलग विचारो के साथ आप के सामने पेश होंगी ।
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