Friday, May 22, 2009

तुम.....

हर चेहरे में तुमको ढूंढा

स्नेह त्याग,प्यार में तुमको पाया

अपनों के दर्द मे पिघली तुम

उनके हर राह की हमसफ़र तुम

जीवन के पतझर में बहार- सी तुम

बदलती दुनिया में विशवास - सी तुम

रुत आए रुत जाए पर

हर दौर में एक - सी तुम

ख्यालों के पन्नों पर तुमसे जुडे

न जाने कितने एहसास डूबते - उतरते

पर शब्दों में क्यों नहीं बंधती तुम

न कभी देखा , न कभी जाना तुमसा

मेरी नज़र से देखो तो जानोगी

ईश्वर का रूप हो तुम ...

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