हर चेहरे में तुमको ढूंढा
स्नेह त्याग,प्यार में तुमको पाया
अपनों के दर्द मे पिघली तुम
उनके हर राह की हमसफ़र तुम
जीवन के पतझर में बहार- सी तुम
बदलती दुनिया में विशवास - सी तुम
रुत आए रुत जाए पर
हर दौर में एक - सी तुम
ख्यालों के पन्नों पर तुमसे जुडे
न जाने कितने एहसास डूबते - उतरते
पर शब्दों में क्यों नहीं बंधती तुम
न कभी देखा , न कभी जाना तुमसा
मेरी नज़र से देखो तो जानोगी
ईश्वर का रूप हो तुम ...
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akhir ye tum hai kaun jo itna kuch hai
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